Farmers Protest: क्यों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं किसान

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Farmers Protest: क्यों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं किसान




केंद्र सरकार द्वारा पारित तीनों कृषि कानूनों को लेकर किसानों का प्रदर्शन लगभग दो महीने से चल रहा है। पहले किसान हरियाणा-पंजाब में प्रदर्शन कर रहे थे। अपनी मांगों पर कोई विचार नहीं होता देख उन्होंने दिल्ली का रूख किया। पिछले  दिनों से किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली में आंदोलनरत हैं।इस इस दौरान सरकार और किसानों के बीच छह दौरे की वार्ता हुई। लेकिन उसमें कोई ठोस हल नहीं निकल सका। सरकार एमएसपी की पहली जैसी व्यवस्था बनाए रखने का आश्वासन दे रही है, उसके बावजूद किसान आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं है।

किसानों का कहना है कि जब तक तीनों कानूनों को सरकार वापस नहीं ले लेती, हम अपना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। वहीं सरकार का कहना है, वह कानूनों में संसोधन को तैयार है, लेकिन इसे वापस नहीं लेगी।

दरअसल, किसान एमएसपी को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाना चाहते हैं। जिससे उन्हें अपनी ऊपज पर लाभ की गारंटी मिल सके। इसके अलावा किसान कांट्रैक्ट फॉर्मिंग को लेकर भी अपनी आशंकाएं व्यक्त कर रहे हैं। इस आंदोलन में किसानों की सबसे मुख्य मांग एमएसपी को लेकर कानून बनाने की है। लेकिन सरकार इस पर कोई कानून नहीं बनाना चाहती है।

 क्या है नई कृषि कानून

सरकार ने हाल ही में 3 नए कृषि कानून पास के हैं पहला कानून जिसका नाम" कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य विधेयक 2020" है,

 दूसरा "कृषि कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक 2020 है "

तीसरा "आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक 2020" इन तीनों कानूनों से निजी क्षेत्र को कृषि क्षेत्र में बढ़ावा बढ़ावा मिलेगा अब निजी क्षेत्र बिना किसी पंजीकरण और बिना किसी जवाबदेही के कृषि उपज के क्रय-विक्रय की खुली छूट मिल गई है निजी क्षेत्र को सीमित भंडारण की छूट मिल गई है , उपज जमा करने के लिए निजी निवेश को छूट होगी

साधारण से अक्षरों में इस कानून के जरिए किसान को खुली छूट मिल गई है कि वह मंडी में बेचने की बजाय किसी और को भी अपनी उपज भेज सकता है अगर उसे मंडी की बजाय वहां उचित और ज्यादा दाम मिल रहा हो क्योंकि पहले किसान को नहीं तो मंडी में ही अपनी उपज बेचनी पड़ती थी इस कानून के जरिए किसान को खुली छूट मिल गई है अब निजी क्षेत्र किसानों से उनके ऊपर खरीद सकेंगे 

क्यों किसान इन कानूनों को फायदेमंद नहीं समझ रहे

अगर इसको समझना है तो तो एक छोटे उदाहरण से मैं किसान की समस्या को उजागर करना चाहता हूं मान लीजिए अनाज की प्रति क्विंटल मंडी में 1450 रुपए है और और निजी क्षेत्र में किसान को ₹2000 मिल रहे हैं तो किसान निजी क्षेत्र में ही बेचना फायदेमंद समझेगा तो इससे क्या होगा कि धीरे-धीरे  प्रत्येक किसान निजी क्षेत्र में ही अपना माल  अपनी उपज बेचेगा जिससे धीरे-धीरे मंडी में समाप्त हो जाएंगी और निजी क्षेत्र का कृषि क्षेत्र पर पूर्ण रूप से कब्जा हो जाएगा अब यूकी निजी क्षेत्र का कृषि क्षेत्र पर कब्जा हो चुका है इसलिए निजी क्षेत्र उपज के कम दाम देना शुरू कर देगा क्योंकि किसान तो अब केवल उन्हीं पर अपनी उपज बेचने को निर्भर है और इसी चिंता के कारण प्रत्येक किसान इन कानूनों का समर्थन नहीं कर रहा है कि धीरे-धीरे जब मंडिया समाप्त हो जाएगी तब निजी क्षेत्र पर ही हम अपनी उपज बेचने को निर्भर हो जाएंगे निजी क्षेत्र कम दाम देने शुरू कर देंगे जिससे किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल पाएगा इसलिए किसान यह मांग कर रहे हैं की आप एक अलग से कानून बनाइए जिसमें एमएसपी यानी उचित मूल्य समर्थन देने की बात हो और अगर कोई भी उचित मूल्य समर्थन से कम दाम दे तो उसे सजा हो

हमारे देश में किसानों की दयनीय दशा क्यों है


आज हम जब "जय जवान जय किसान "का नारा लगाते हैं तो इसमें जवान और किसान दोनों की जय करते हैं क्योंकि यह दोनों ही हमारे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं जवान सीमा पर देश की रक्षा करता है तो किसान देश का पालन करता है लेकिन फिर भी हमारे देश में किसानों की आज  दयनीय स्थिति है उपज का सही दाम नहीं मिल रहा किसानों को अपनी मांगों को लेकर इतना प्रदर्शन  करना पड़ रहा है, प्रत्येक रोज अनेकों किसान कर्ज तले दबे होने की कारण आत्महत्या करते हैं क्योंकि उन्हें उनकी उपज का सही दाम ही नहीं मिल पाता ,जबकि हमें सोचना चाहिए कि यह वही किसान है जिनकी मेहनत से  परिश्रम से  उगाए हुए फल सब्जियों से हम अपना  पेट भरते हैं  हमें सोचना चाहिए ऐसा क्यों है तो मैं आपको एक उदाहरण के जरिए समझाना चाहता हूं 

सन 1970 मैं जब गेहूं की कीमत 76 पर प्रति क्विंटल थी आज 2015 में यानी 45 साल बाद वह कीमत  1450 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंची है जबकि अगर हम देश के दूसरे क्षेत्रों की बात करें तो एक सरकारी मुलाजिम की तनख्वाह इस दौरान 120 से 150 फ़ीसदी , टीचर की तनख्वाह 280 से 320 फीसदी यानी इतने बड़े बड़े अंतरों से बड़ी है लेकिन किसान की आय देखे वह आप 76 रुपए से मात्र 1450 यानी कि केवल 19 फ़ीसदी बढ़ी है

इस प्रकार इतना अंतर हमारी किसान और दूसरे क्षेत्र के लोगों के बीच आया आज सरकार सरकारी क्षेत्र के मुलाजिमों को इतनी तरह के प्रावधान उपलब्ध करवाती है कई प्रकार के उनको फायदे दिए जाते  ,कभी सरकार ने किसानों को उनका हक दिया ही नहीं अगर हम किसानों की उपज के दाम 100 फ़ीसदी भी बढ़ाते तो आज गेहूं के दाम बढ़कर 76 रुपए से  ₹7600 रुपए हो जाते जबकि हम किसानों को केवल इस वक्त 1935(msp for 20-21) रुपए उपलब्ध करवा रहे हैं

इस प्रकार किसानों और अन्य क्षेत्रों के लोगों के बीच कितना अंतर आ गया है सरकार यह सोच के दाम नहीं बढ़ाती कि इसके अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ जाएंगी और इतना पैसा आएगा कहां से लेकिन हमें यह भी सोचना चाहिए कि बाकी क्षेत्रों में पैसा देने के लिए वह पैसा कहां से आता है

अंत में इस वीडियो को जरूर देखें

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