फौलाद की तरह सख्त लौह पुरुष सरदार पटेल

Contact Us

Email-id kushalsuri30@gmail.com Twitter @gkgyankksuri

फौलाद की तरह सख्त लौह पुरुष सरदार पटेल

 

वल्लभभाई झावेरभाई पटेल (३१ अक्टूबर १८७५ – १५ दिसंबर १९५०), जो सरदार पटेल के नाम से लोकप्रिय थे, एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। वे एक भारतीय अधिवक्ता और राजनेता थे, जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और भारतीय गणराज्य के संस्थापक पिता थे जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए देश के संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाई और एक एकीकृत, स्वतंत्र राष्ट्र में अपने एकीकरण का मार्गदर्शन किया। । उन्होंने भारत के राजनीतिक एकीकरण और 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान गृह मंत्री के रूप में कार्य किया


सरदार पटेल ने उन ऐतिहासिक पलों में अपनी दृढ़ अधारवादी दूरदर्शिता बुद्धिमता का परिचय दिया जो देश को कई बार विकट परिस्थितियों से बाहर निकालने में सहायक हुई उनके जीवन में नीति नियम सिद्धांत बिल्कुल स्पष्ट दें यही कारण है कि उनका ऐसा व्यक्तित्व था जो दूसरों को भी झुकने को मजबूर कर देता था आइए देखिए कुछ प्रमुख राजनेताओं और प्रमुख व्यक्तियों द्वारा की गई उनके प्रति टिप्पणियां

गांधी जी द्वारा

महात्मा गांधी जी ने सरदार पटेल को लौह पुरुष की उपाधि दी थी नवंबर 1917 में सरदार पटेल पहली बार गांधी जी के संपर्क में उस समय उनका पहनावा हैट ,सूट और बूट का था लेकिन असहयोग आंदोलन में सरदार पटेल ने स्वदेशी खादी धोती कुर्ता और चप्पल अपनाएं तथा विदेशी कपड़ों की होली जलाई गांधीजी के संपर्क पर आने के बाद उनमें परिवर्तन आ गया इसके बाद गांधी जी के विचारों को समझ कर आगे चलने वालों में कोई था तो वह सरदार पटेल ही थे गांधी जी ने सुराज से स्वराज की बात कही तो सरदार पटेल ने स्वराज और सुशासन को प्रमुखता दी थी राष्ट्रपिता के विचारों को भावनाओं को सही परिप्रेक्ष्य में आत्मसात करने वाले राजनेताओं में एक थे सरदार पटेल

लॉर्ड माउंटबेटन


लॉर्ड माउंटबेटन सरदार पटेल जी के व्यक्तित्व से काफी प्रभावित थे और कहते थे "पटेल जी वर्षों से भारत में एक शक्तिशाली पुरुष की भांति विराजमान है मुझे नहीं लगता कि एक बार आपने अपना मन बना लिया तो देश में कोई भी आपकी खिलाफ खड़ा होने की हिम्मत कर सकता है"

विंस्टन चर्चिल


विंस्टन चर्चिल द्वितीय विश्व युद्ध के समय जो इंग्लैंड के प्रधानमंत्री थे एक कूटनीतिज्ञ और प्रखर वक्ता थे जो सेना में भी अधिकारी रह चुके थे वह चर्चिल जिन्होंने हिटलर सेना की सेना को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई बहुत जब आईसीएस भारतीय नागरिक सेवाएं(ICS) के कन्वोकेशन यानी दीक्षांत समारोह में जाते तो उनको एक ही बात कहते कि आप "जब भी भारत जाओ तो वहां गांधी और पटेल से कभी मत बहस करना" वह चर्चिल कहते थे "I am not afraid of Hitler but I'm afraid of half naked fakir and Patel of India" तो आप कल्पना कर सकते हैं कि कैसा व्यक्तित्व था हमारे लोह पुरुष का

600 देशी रियासतों का भारत में विलय


स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय एकता की जब भी बात होती है तो सरदार पटेल का नाम सबसे पहले ध्यान में आता है उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति नेतृत्व कौशल और अदम्य साहस का ही कमाल था कि 600 देसी रियासतों का भारतीय संघ में विलय हो सका यह वही सरदार पटेल थे जिनकी दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण ही हैदराबाद के निजाम ने उनके सामने घुटने टेक दिए थे यह उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति का  ही कमाल है कि जम्मू और कश्मीर भारत का हिस्सा बन पाया यही उनकी दृढ़ संकल्प था 600 देसी रियासतों ने भारत में विलय के लिए अपना मन बना लिया अंग्रेज अच्छी तरह से समझते थे कि इन  रियासतों का विलय एक जटिल क्रिया है इसलिए उन्होंने यह कार्य स्वतंत्रता के बाद सरकार पर ही छोड़ दिया लॉर्ड माउंटबेटन ने कहा था कि भारत में निर्णय लेने की क्षमता किसी में है तो वह केवल सरदार पटेल में आजादी के बाद विभिन्न रियासतों में बिखरे भारत के भू राजनीतिक एकीकरण में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए पटेल को भारत का लौह पुरुष कहा जाता है आज हम जिस कश्मीर से कन्याकुमारी तक पहले विशाल भारत को देख पाते हैं उसकी कल्पना शायद सरदार पटेल के बिना कभी पूरी नहीं हो पाती जिन्होंने छोटे-छोटे रजवाड़ों और राजघरानों को एक कर भारत में सम्मिलित किया

एक छोटी सी घटना -

 शेख अब्दुल्ला से जुड़ी यह घटना शेख अब्दुल्ला उस समय कश्मीर के नेता लोकसभा में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 पर चर्चा हो रही थी अचानक अशांत अब्दुल्ला ने उठकर यह कहते हुए सदन को हैरान कर दिया मैं कश्मीर वापस जा रहा हूं इस व्यवहार से भारत के कश्मीर पर चर्चा करने के अधिकार पर भी सवाल खड़े हो गए नेहरू जी की अनुपस्थिति में प्रधानमंत्री की जगह पटेल जी को उनसे निपटना था उन्होंने बहस में हस्तक्षेप नहीं किया लेकिन बाद में अब्दुल्ला को संदेश भेजा उन्होंने लिखा "आज सदन छोड़कर तो जा सकते हो परंतु दिल्ली छोड़कर नहीं जा सकते "उनका यही संदेश काफी था  और उन्होंने कश्मीर जाना रद्द कर दिया




कितना विशाल व्यक्तित्व, दृढ़ निश्चय होगा ऐसे महापुरुषों  इसलिए उनके द्वारा किए गए भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए आइए हम सब मिलकर एक श्रेष्ठ भारत का निर्माण करें


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ