ऑपरेशन पोलो, आज के दिन हैदराबाद बना था भारत का हिस्सा

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ऑपरेशन पोलो, आज के दिन हैदराबाद बना था भारत का हिस्सा


15 August 1947 को हमें आजादी तो नसीब हो गई थी लेकिन वह मुकम्मल नहीं थी कई रियासतें भारत से अलग होने पर  तुली थी दरअसल भारत की आजादी के साथ ही हमें कई समस्याएं विरासत में मिली भारत की स्वतंत्रता के बाद आजादी के बाद भारत 565 देशी रियासतों में बंटा था। ये देशी रियासतें स्वतंत्र शासन में यकीन रखती थीं जो सशक्त भारत के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा थी। हैदराबाद, जूनागढ़और कश्मीर को छोड़कर 562 रियासतों ने स्वेच्छा से भारतीय परिसंघ में शामिल होने की स्वीकृति दी थी। भारतीय संघ का गठन हो रहा था तब जम्मू कश्मीर जूनागढ़ और हैदराबाद जो सबसे तीन बड़ी रियासतें थी उन्होंने भारत में मिलने से मना कर दिया जम्मू कश्मीर और जूनागढ़ ने तो थोड़े ना नुकर के बाद भारत की अधीनता स्वीकार कर ली लेकिन हैदराबाद की रियासत    अपने लिए स्वतंत्र देश की ख्वाहिश मंद हो गए हैदराबाद के निजाम ने भारत के बीच में होते हुए भी स्वतंत्र देश रहने की कवायद शुरू कर दी थी

1947 में गृह मंत्री सरदार पटेल ने भारत में शामिल होने के लिए हैदराबाद के अंतिम  निजाम से अनुरोध किया लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया इसके बजाय उन्होंने 15 अगस्त को हैदराबाद को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया सरदार पटेल ने सेना के सहयोग से ऑपरेशन पोलो सितंबर 1948 को जो कि भारतीय सेना की गुप्त ऑपरेशन का नाम था जिसमें हैदराबाद के आखिरी निजाम को सत्ता से निरस्त कर दिया और हैदराबाद को भारत का हिस्सा बना लिया


 हैदराबाद रियासत(1724-1948)
मुगलों के दक्‍कन में गवर्नर मीर कमरुद्दीन खान ने 1724 में स्‍वतंत्र हैदराबाद रियासत की स्‍थापना की. उससे पहले 1713-21 तक वह दक्‍कन का गवर्नर था. वह निजाम-उल-मुल्‍क के टाइटल के साथ गद्दी पर बैठा और आसिफ जाही वंश की स्‍थापना की. इस वंश के सात निजाम ने 1948 तक हैदराबाद रियासत पर राज किया. उस्‍मान अली खान अंतिम निजाम था.

 भौगोलिक स्थिति

भौगोलिक लिहाज से हैदराबाद रियासत देश के दक्षिण-मध्‍य क्षेत्र में स्थित थी. इसकी राजधानी हैदराबाद थी. मौजूदा तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्‍ट्र के कुछ हिस्‍सों से मिलकर यह रियासत बनी थी. अंग्रेजों के जमाने में उनसे सहयोग संधि स्‍थापित करने वाली हैदराबाद पहली रियासत थी.

जब भारत में विलय हुआ, उस वक्‍त बाकियों की तुलना


में हैदराबाद सबसे बड़ी और संपन्‍न रियासत थी. इसका भौगोलिक दायरा तकरीबन 82 हजार वर्ग मील था. 1941 की जनगणना में इसकी आबादी 1.6 करोड़ थी. उसमें से 85 प्रतिशत आबादी हिंदू थी लेकिन रियासत के 40 प्रतिशत भू-भाग का मालिकाना हक निजाम और मुस्लिम कुलीन वर्ग के पास था.


 Operation Polo ऑपरेशन पोलो( पूरा घटनाक्रम)


पाकिस्तान द्वारा सहायता प्राप्त हैदराबाद का विचार भारत सरकार के साथ अच्छा नहीं रहा। सरदार पटेल ने एक स्वतंत्र हैदराबाद के विचार को "भारत के दिल में एक अल्सर के रूप में वर्णित किया जिसे शल्य चिकित्सा से हटाने की आवश्यकता थी।" यह तब था जब भारत और हैदराबाद के बीच बातचीत शुरू हुई थी और भारत ने हैदराबाद को रद्द करने का फैसला किया। इस ऑपरेशन को "ऑपरेशन पोलो" नाम दिया गया था और इसे कई बार "ऑपरेशन कैटरपिलर" भी कहा जाता है।

हालाँकि यह केवल पांच-दिवसीय युद्ध था जो 13 सितंबर से शुरू हुआ था और 18 सितंबर तक चला था, यह महत्वपूर्ण था क्योंकि भारतीय सेना ने एक शक्तिशाली राज्य पर कब्जा कर लिया था और हैदराबाद भारत से जुड़ा हुआ था।

आपातकाल की स्थिति तब घोषित की गई जब 36,000 भारतीय सैनिकों ने हैदराबाद में प्रवेश किया क्योंकि सरकार इस बारे में आशंकित थी कि शेष भारत कैसे प्रतिक्रिया देगा। ऐसा अनुमान है कि 32 लोग मारे गए थे और 97 घायल हुए थे भारतीय और 490 मारे गए और 122 घायल हुए थे हैदराबाद से।


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