मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों, स्वामी विवेकानंद

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मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों, स्वामी विवेकानंद

 


स्वामी विवेकानंद का शिकागो में भाषण
आज ही के दिन वर्ष 1893 में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में एक मशहूर भाषण दिया था. उन्होंने भारत के आध्यात्मिक विचारों को दुनिया के सामने रखा था.. अपने भाषण में स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि उन्हें हिंदू धर्म का अनुयायी होने पर गर्व है. शायद कम लोगों को ये पता हो कि Indian Institute of Science की स्थापना के पीछे स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा है. धर्म संसद में शामिल होने के लिए स्वामी विवेकानंद जिस समुद्री जहाज से अमेरिका जा रहे थे, उसी में उनकी मुलाकात उद्योगपति जमशेतजी टाटा (Jamsetji Tata) से हुई. उसी दौरान विवेकानंद ने उन्हें युवाओं के लिए एक वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान खोलने की सलाह दी थी. 1909 में जमशेतजी टाटा और मैसूर के राजा कृष्ण राज वाडियार ने मिलकर Indian Institute of Science की स्थापना की 



जीवन परिचय

स्वामी विवेकानन्द(जन्म: 12 जनवरी,1863 - मृत्यु: 4 जुलाई,1902) वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1863 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुँचा। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है। वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे



चौथे व्यक्ति थे जिन्होंने बहनों और भाइयों से संबोधन शुरू किया

स्वामी विवेकानंद पहले नहीं बल्कि चौथे व्यक्ति से जिन्होंने भाइयों और बहनों से संबोधन शुरू किया उनसे पहले तीन व्यक्ति जिसमें से एक श्रीलंका के धम्मपाल अंगीकार, दूसरे व्यक्ति जापान के बौद्ध भिक्षु , तीसरे व्यक्ति हिंदुस्तान के प्रताप चंद्र  थे |स्वामीी विवेकानंद चौथे व्यक्ति थे लेकिन क्या बात थी , स्वामी विवेकानंद का भाषण प्रसिद्ध हुआ क्योंकि उनके भाषण में वह हिंदुत्व भ्रातृत्व  का भाव था |उन अमेरिका वासी जो उनको "यू ब्लैक गेट आउट" कहकर अपमान करते थे , अमेरिका वासी जो उनका तिरस्कार करते थे ,मन में इतना अपमान सहने के बावजूद भी उनके मन में  वसुधैव कुटुंबकम "का भाव था हिंदुस्तानी सभ्यता, सभी के प्रति अच्छे भाव रखना|

 सुभाष चंद्र बोस स्वामी विवेकानंद के बारे में कहते हैं की 

"जो बात गले से कही जाए वह गले तक रहती है ,जो बात दिल से कही जाए वह दिल तक पहुंचती है और स्वामी विवेकानंद प्रत्येक बात दिल से करते थे और उनकी बात ह्रदय तक पहुंचती थी"


भाषण के प्रमुख अंश

आज से 127 साल पहले स्वामी विवेकानंद ने हिंदुत्व भारतीय  भ्रातृत्व का  बोध विश्व को करवाया था उनके भाषण के कुछ प्रमुख अंश-

  1. अमेरिका के बहनों और भाइयों, आपके इस स्नेहपूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय अपार हर्ष से भर गया है और मैं आपको दुनिया की प्राचीनतम संत परम्परा की तरफ से धन्यवाद देता हूं. 
  2. मैं आपको सभी धर्मों की जननी की तरफ से धन्यवाद देता हूं और सभी जातियों, संप्रदायों के लाखों, करोड़ों हिन्दुओं की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं.मेरा धन्यवाद कुछ उन वक्ताओं को भी है, जिन्होंने इस मंच से यह कहा कि दुनिया में सहनशीलता का विचार सुदूर पूरब के देशों से फैला है. 
  3. मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं, जिसने दुनिया को सहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया. हम सिर्फ सार्वभौमिक सहनशीलता में ही विश्वास नहीं रखते, बल्कि हम विश्व के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं.
  4. मुझे गर्व है कि मैं उस देश से हूं जिसने सभी धर्मों और सभी देशों के सताए गए लोगों को अपने यहां शरण दी. मुझे गर्व है कि हमने अपने दिल में इसराइल की वो पवित्र यादें संजो रखी हैं जिनमें उनके धर्मस्थलों को रोमन हमलावरों ने तहस-नहस कर दिया था और फिर उन्होंने दक्षिण भारत में शरण ली.
  5.  मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं जिसने पारसी धर्म के लोगों को शरण दी और लगातार अब भी उनकी मदद कर रहा है.



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