सावित्रीबाई फुले
सावित्रीबाई फुले को भारत की प्रथम महिला शिक्षक कहा जाता है उन्होंने हमेशा लड़कियों की शिक्षा पर जोर दिया और उनके हक के लिए लड़ाई लड़ी है| जब वह लड़कियों को पढ़ाने जाती तो उन पर गोबर, पत्थर ,सब्जियां फैकी गई लेकिन इसके बावजूद उन्होंने लड़कियों को पढ़ाना नहीं छोड़ा |वर्ष 1848 में उन्होंने पुणे में बालिका विद्यालय की स्थापना की और इसमें खुद शिक्षिका भी बनी| सावित्रीबाई फुले तथा उनके पति ज्योतिबा राय गोविंदराव फुले ने समाज के लिए और के इस सराहनीय कार्य किए उन्होंने महिलाओं के लिए "बाल हत्या प्रतिबंधक गृह" नामक केयर सेंटर भी खोलें
मारिया मोंटेसरी
यह वह महिला थी जिन्होंने नर्सरी स्कूल की परंपरा शुरू की 18 से 70 में इटली में जन्मी मारिया मांटेसरी ने अपना जीवन शिक्षा को समर्पित कर दिया उन्होंने इस विचार को प्रचारित किया कि बच्चों को अपने भविष्य को अपने तरीके से आकार देने में सक्षम होना चाहिए इसे मोंटसरी मेथड का नाम दिया गया और दुनिया भर में लगभग 30000 स्कूलों द्वारा आज भी इसका अनुसरण किया जाता है
एमा विलार्ड
एम्मा एक अंग्रेज किसान परिवार की बेटी थी ऐसी पृष्ठभूमि से होने के बाद भी और 28 वी सदी की वजह से अम्मा के पास शिक्षा की दुनिया में बहुत बड़ा बदलाव लाने के लिए संसाधन नहीं थे परंतु उन्होंने ऐसा कर दिखाया केवल 20 वर्ष की आयु में वह एक शिक्षिका नहीं एक गर्ल्स एकेडमी की प्रमुख हुई बन गई 1819 में उन्होंने महिला शिक्षा में सुधार के लिए प्रस्ताव लिखा जिसे तत्कालीन आम जनता द्वारा खूब सराहा गया
Mary McLeod bethune
मेरी का नाम संघर्ष और उपलब्धि का पर्याय है उनके जन्म से पहले अमेरिका में उनके माता-पिता दोनों गुलाम थे इसलिए उनके पास अपनी बेटी मेरी को स्कूल भेजने के लिए धन नहीं था ना कि मेरी ने छात्रवृत्ति हासिल की और पढ़ाई करके स्वयं एक शिक्षिका बन गई उन्होंने फ्लोरिडा में bethune-cookman कॉलेज की स्थापना की जिसे पहले"daytona normal and industrial institute for Negro girls" के नाम से जाना जाता था
हेलेन केलर Helen Keller
शायद ही किसी को इनके बारे में परिचय की आवश्यकता होगी जिन्हें दुनिया के सबसे प्रेरणादायक व्यक्तित्व में से एक माना जाता है |देखने तथा सुनने में असमर्थ हेलेन ने अपने व्यक्तिगत गुरु Annie sulivan के तहत पढ़ाई की और ज्ञान के माध्यम से सारी दुनिया में नाम कमाया इस अमेरिकी महिला ने सैकड़ों लोगों को ज्ञान का मार्ग दिखाया जो दुनियाभर में लाखों लोगों को आज भी प्रेरित करती हैं|
Clara Barton
औपचारिक शिक्षा किसी भी व्यक्ति को दुनिया को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकती है लेकिन ऐसी स्थिति में जब दुनिया खतरे में हो तो कौशल काम आते हैं क्लारा बटन वह महिला जिन्होंने अमेरिका रेड क्रॉस की स्थापना उस समय की जब महिलाओं को घर के बाहर काम करते हुए शायद ही देखा जाता था स्वयं एक नर्स होने के नाते उन्होंने बुनियादी चिकित्सा ज्ञान और नरसिंह की भावना समिति तथा आत्मसात करने की आवश्यकता के बारे में एक पूरी पीढ़ी का मार्गदर्शन किया
कादंबिनी गांगुली
गांगुली भारत की पहली महिला स्नातक थी वह देश की पहली महिला चिकित्सक भी थी और उन्होंने कोयला खदानों में काम करने वाली महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए काफी काम किया
दुर्गाबाई देशमुख
दुर्गाबाई देशमुख एक स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने महात्मा गांधी के आदर्शों पर चलते हुए स्कूलों की स्थापना की और उनमें महिलाओं को चरखा चलाने और काटने की ट्रेनिंग दी आजादी के संघर्ष में लिप्त होने के बावजूद दुर्गाबाई ने अपनी पढ़ाई के लिए वक्त निकाला और बीए व एमए की डिग्री हासिल की, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की मैट्रिक शिक्षा के लिए उन्होंने आंध्र महिला सभा की स्थापना भी की जहां लड़कियों को उस परीक्षा की ट्रेनिंग दी जा सके
महादेवी वर्मा
महादेवी वर्मा हिंदी भाषा की प्रख्यात कवित्री स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद थी उनकी शुरुआती शिक्षा इंदौर में हुई उन्होंने 7 वर्ष की आयु से ही कविताएं लिखना शुरु कर दिया था उनकी गिनती हिंदी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों सुमित्रानंदन पंत जयशंकर प्रसाद और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के साथ की जाती है इलाहाबाद के प्रयाग महिला विद्यापीठ में उन्होंने बतौर प्रिंसिपल और वाइस चांसलर के तौर पर काम किया
सुगरा हुमायूं मिर्जा
उन्होंने महिला अधिकारों को अपनी आवाज दी वह समाज सुधारक थी और कई महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचने वाली पहली महिला बनीं| उन्हें हैदराबाद की पहली महिला संपादक माना जाता है ,उन्होंने स्त्रियों के लिए पत्रिका निकाली और अन -निसा और जब -उन- निसा पत्रिकाओं का संपादन किया |उन्होंने पर्दे में में कैद जिंदगी से खुद को आजाद किया घर से बाहर बिना पर्दे के निकलने वाली वह हैदराबाद दकन इलाके की पहली महिला मानी जाती हैं सन 1934 में उन्होंने हैदराबाद में लड़कियों के लिए मदरसा सफदरिया शुरू किया जो आज भी सफदरिया गर्ल्स हाई स्कूल के नाम से चल रहा है|










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