ब्रिटिश हुकूमत से 5 साल पहले आजाद हुआ बलिया

Contact Us

Email-id kushalsuri30@gmail.com Twitter @gkgyankksuri

ब्रिटिश हुकूमत से 5 साल पहले आजाद हुआ बलिया

 

बगावत को हमराह बनाने वाली बलिया ने सन 1942 में 19 अगस्त को क्रांति में सफलता की अमिट कहानी लिख डाली, देश की आजादी से 5 साल पहले स्वतंत्र होने का बलिया को तमगा मिला ,जो इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो गयाl 19 अगस्त 1942 को यहां के वीर सपूतों ने अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ फेंका था इतना ही नहीं बलिया को राष्ट्र घोषित कर यहां सरकार भी बनाई गई

बलिया में फूटी थी भारत की स्वतंत्रता की पहली किरण

पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार का जब भी जिक्र होता है आधुनिक भारत में दोनों इलाकों के प्रति अजीब तरह का उपेक्षा भाव झलकता है लेकिन अगर इन दोनों प्रदेशों की माटी के कण-कण के इतिहास पर शोध किया जाएगा तो हजारों लाखों गौरव की घटनाएं सामने आ खड़ी होगी lपूर्वी उत्तर प्रदेश का एक जिला है बलिया भदेस भाषा, मंगल पांडे और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के अलावा  इसका अपना अलग इतिहास है अंग्रेजों को देश छोड़ने के लिए मजबूत करने वाले करेंगे या मरेंगे के गांधीजी के आवाहन के बाद देश की जिन चुनिंदा जगहों  ने अपने शौर्य और पराक्रम के बल पर 1942 में खुद को आजाद कर लिया था उनमें से एक बलिया भी है

बलिया में क्रांति

बलिया में क्रांति का रूप ऐसा था जिसके सामने गांव के चौकीदार से लेकर कलेक्टर तक को नतमस्तक होना पड़ा 10 अगस्त को शुरू हुई अहिंसक क्रांति से अंग्रेजी राज के सभी गढ़ ढह  गए नौकरशाही भाग खड़ी हुई एक के बाद एक थाने पर तिरंगा लहराता चला गया और अंग्रेजी प्रशासन समाप्त हो गया बलिया के लोगों ने अपने अदम्य साहस और शौर्य के दम पर लगभग पौने दो सौ साल से पड़ी गुलाम मीडिया काट दी और 19 अगस्त 1942 कोई स्वतंत्रता के सुप्रभात का दीदार कर लिया चित्तू पांडे के नेतृत्व में लोगों ने कलेक्ट्रेट सहित सभी सरकारी कार्यालयों पर तिरंगा झंडा फहराया श्याम क्रीम 6:00 बजे बलिया को आजाद राष्ट्र घोषित करते हुए देश में सबसे पहले ब्रिटिश सरकार के समानांतर तंत्र बलिया प्रजातंत्र की सरकार का गठन हुआ चित्तू पांडे को शासन अध्यक्ष नियुक्त किया गया 84 वीर सपूत शहीद हो गए थे

उन दिनों के प्रमुख नारे थे 

12, लाल पगड़ी फेंक दो,,

 123, लाल पगड़ी छीन,,

 1234 ,लाल पगड़ी फाड़ डाल

इस आंदोलन को उग्र बनाने में जिले के नौजवानों का बड़ा हाथ था उन्होंने गांव-गांव पहले उन रईसों की बंदूके इकट्ठा करने का अभियान चलाया 13 से 18 अगस्त के बीच जिले के सभी डाकघर रेलवे स्टेशन लूट लिए गए बलिया को गुस्से में भरने में 18 अगस्त को रसड़ा और बेरिया थाने पर हुई घटनाओं ने बड़ी भूमिका निभाई नारायणगढ़ निवासी कौशल किशोर सिंह नाम के 20 साल के नौजवान तिरंगा फहराने के लिए नौजवानों के साथ आगे बढ़े लेकिन पुलिस ने उनको गोली मार दी देखते ही देखते गोलियों की बौछार से 22 लोग शहीद हो गए लेकिन लोगों ने थाने पर तिरंगा लहरा कर ही दम लिया

22 अगस्त तक रही आजादी

भारत की स्वतंत्रता की पहली किरण बलिया में ही फूटी है बाकी है यदि अधिक दिनों तक कायम नहीं रह सकी और 22 अगस्त 1942 की देर रात अंग्रेजी फौज बलिया पहुंची अंग्रेजी फौज के साथ नेदर सोल को विशेष अधिकार से लैस प्रशासक बना कर बलिया भेजा गया था नेदर सोल ने कलेक्टर के बंगले पर पहुंचकर जिले का प्रशासन अपने हाथ में लेने की घोषणा कर दी फिर से जिला की सत्ता पर एक बार अंग्रेज़ों का कब्जा हो गया ब्रिटिश हुकूमत ने एक के बाद एक सुखपुरा रसड़ा चितबड़ागांव आदि अनेक स्थान पर वीर सपूतों पर गोलियां बरसाई इसमें कौशल कुमार, चंडी प्रसाद ,गौरीशंकर, मक -तुलिया देवी सहित कुल 84 लोग शहीद हो गए थेl चित्तू पांडे, महानंद  मिश्र, राधा मोहन, जगन्नाथ , रामानंद पांडे, राजेश्वर त्रिपाठी ,उमाशंकर, विश्वनाथ मर्दाना, विश्वनाथ चौबे आदि को जेल में डाल दिया लेकिन बलिया वालों ने अपने तेवर और पराक्रम से यह दिखा दिया कि उसे यूं ही बागी नहीं कहा जाता

"बलिया की सरजमीं को चूम लेना चाहता हूं"

बलिया की क्रांति तब के लगभग हर नेता ने सराहना की थी कांग्रेश के तब के तत्कालीन अध्यक्ष मौलाना अबुल कलाम आजाद ने कहा था कि मैं बलिया की उस सरजमीं को चूम लेना चाहता हूं जहां इतने बहादुर और शहीद पैदा हुए आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जी ने42 के आंदोलन में बलिया की भूमिका को सराहा था उन्होंने कहा था अगर 1942 में मैं जेल से बाहर होता तो मैंने वही किया था जो बलिया की जनता ने किया

सिद्ध हुआ बापू का संकल्प

"करो या मरो" के नारे के साथ राष्ट्रपिता ने 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' आंदोलन का शंखनाद किया था lब्रिटिश शासन की ओर से सत्ता की तुरंत हस्तांतरण का प्रस्ताव ठुकरा दिए जाने के बाद, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की विशेष बैठक में महात्मा गांधी ने कहा था ."या तो हम हिंदुस्तान को आजाद करा कर रहेंगे या शहीद हो जाएंगे, मैं स्वतंत्रता चाहता हूं पूर्ण स्वतंत्रता से कम किसी भी चीज से संतुष्ट नहीं हो सकता" जिस पूर्ण स्वतंत्रता के संकल्प के साथ उस संकल्प को बलिया ने सिद्ध कर दिखाया


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ