शीर्ष 15 भारतीय खिलाड़ी जिन्होंने भारत को पूरे विश्व भर में गौरवान्वित किया,top 15Indian athlete who made India proud across world

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शीर्ष 15 भारतीय खिलाड़ी जिन्होंने भारत को पूरे विश्व भर में गौरवान्वित किया,top 15Indian athlete who made India proud across world

भारतीय🇮🇳 नागरिक पूरे विश्व में अपनी योग्यता और क्षमता के लिए जाने जाते हैं प्रत्येक भारतीय नागरिक हर क्षेत्र में अपना पूर्ण योगदान देता है और उसमें सफलता भी प्राप्त करता है आज हम बात कर रहे हैं ऐसे भारतीय खिलाड़ियों की जिन्होंने भारतीय खेलों को बदला और पूरे विश्व भर में भारत को गौरवान्वित किया और भारत को विश्व में उसकी पहचान दिलवाई.
15.. साक्षी मलिक

   साक्षी मलिक एक भारतीय महिला  पहलवान है. इन्होंने ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में हुए 2016 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता .भारत के लिए ओलंपिक पदक जीतने वाली वह पहली महिला पहलवान है. इससे पहले उन्होंने ग्लासगो में आयोजित 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक जीता था. 2014 के विश्व कुश्ती प्रतियोगिता में भी इन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया. वह एक जाट समुदाय से है.


14.. सुनील छेत्री
   
    सुनील छेत्री एक भारतीय पेशेवर फुटबॉलर है जो एक ,स्ट्राइकर या विंगर के रूप में खेलते हैं और इंडियन सुपर लीग के क्लब बेंगलुरू एफसी और भारतीय राष्ट्रीय टीम दोनों में कप्तान हैं .लोकप्रिय रूप से कैप्टन फैंटास्टिक  के रूप में उन्हें जाना जाता है .जिसने क्रिस्टीयानो रोनाल्डो के बाद सक्रिय खिलाड़ियों के बीच अंतरराष्ट्रीय मैचों में सर्वाधिक गोल करने के मामले में दूसरा पद हासिल किया है. भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए सर्वकालिक  72 राष्ट्रीय गोल के साथ सुनील छेत्री को एएफसी द्वारा उनके 34 वें जन्मदिन पर एशियाई आईकॉन नामित किया गया था. छेत्री का नाम अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ प्लेयर ऑफ द ईयर 6 बार 2007, 2011 ,2013 ,2014, 2017 और 2018-19 में रखा गया था.

13.. मिताली राज
  
  मिताली राज भारतीय महिला क्रिकेट की मौजूदा कप्तान है वह टेस्ट क्रिकेट मैच में दोहरा शतक लगाने वाली पहली महिला हैं. जून 2018 में मिताली राज ट्वेंटी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में 2000 रन बनाने वाली पहली भारतीय बल्लेबाज बनी .मिताली राज महिला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 6000 रनों को पार करने वाली एकमात्र महिला  क्रिकेटर है .मिताली राज भारत की पहली ऐसी महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में 2000 या इससे ज्यादा रन बनाएं . वह एकमात्र खिलाड़ी( पुरुष या महिला )हैं जिन्होंने एक से अधिक आईसीसी ओडीआई विश्व कप फाइनल में भारत का नेतृत्व किया जो 2005 और 2017 में दो बार ऐसा था.

12.. महेंद्र सिंह धोनी
  
महेंद्र सिंह धोनी अथवा लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र सिंह धोनी झारखंड के राजपूत परिवार में जन्मे पद्म भूषण ,पद्म श्री और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित क्रिकेट खिलाड़ी हैं वह भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और भारत के सबसे सफल एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय कप्तान रह चुके हैं .उनकी कप्तानी में भारत ने 2007 आईसीसी विश्व ट्वेंटी- 20, 2007 -08 कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज, 2011 क्रिकेट विश्व कप ,आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2013 और बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी जीती जिसमें भारत ने ऑस्ट्रेलिया को चार- शून्य से हराया था .उन्होंने भारतीय टीम को श्रीलंका और न्यूजीलैंड में पहली अतिरिक्त वनडे सीरीज दिलाई. 2 सितंबर 2014 को उन्होंने भारत को 24 साल बाद इंग्लैंड के वनडे सीरीज में जीत दिलाई. धोनी लगातार दूसरी बार क्रिकेट विश्व कप में 2015 में भारत का नेतृत्व किया और वे यह भारत के पहले ऐसे कप्तान बने जिन्होंने 100 वनडे मैच जिताए हैं. धोनी ने 4 जनवरी 2017 को भारतीय एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय और ट्वेंटी-20 अंतरराष्ट्रीय टीम की कप्तानी छोड़ी.

11.. सानिया मिर्ज़ा

 सानिया मिर्जा भारत की टेनिस खिलाड़ी है. 2003 से 2013 में लगातार एक दशक तक उन्होंने महिला टेनिस संघ की एकल और डबल में शीर्ष भारतीय टेनिस खिलाड़ी के रूप में अपना स्थान बनाए रखने में सफल रही उसके बाद एकल प्रतियोगिता से उनकी सेवानिवृत्ति के बाद शीर्ष स्थान पर अंकिता रैना विराजमान हुई. मात्र 18 वर्ष की आयु में विश्व स्तर पर चर्चित होने वाली इस खिलाड़ी को 2006 में पद्म श्री सम्मान प्राप्त किया गया .यह सम्मान पाने वाली वह सबसे कम उम्र की खिलाड़ी हैं. उन्होंने 2006 में अमेरिका में विश्व की टेनिस की दिग्गज हस्तियों के बीच डब्ल्यूटीए का "मोस्ट इंप्रेसिव न्यू कमर अवार्ड" प्रदान किया गया था. अपने कैरियर की शुरूआत इन्होंने 1999 में विश्व जूनियर टेनिस चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर की. इसके बाद उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मैचों में हिस्सा लिया और सफलता भी पाई 2003 उनके जीवन का सबसे रोचक मोड़ बना जब भारत की तरफ से वाइल्ड कार्ड एंट्री करने के बाद सानिया मिर्जा ने भी विंबलडन में डबल्स के दौरान जीत हासिल की. 2004 में बेहतर प्रदर्शन के लिए उन्हें 2005 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
 2009 में वह भारत की तरफ से ग्रैंडस्लैम जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनी .वर्तमान में वह नवगठित भारतीय राज्य तेलंगाना की 'ब्रांड एंबेस्डर 'हैं.

10.. पंकज आडवाणी
   
  पंकज आडवाणी स्नूकर और बिलियर्ड्स के विश्व विजेता है .पंकज ने पहला पेशेवर बिलियर्ड्स विश्व खिताब 2009 में जीता. इसके पहले वह एमेच्योर विश्व बिलियर्ड्स और स्नूकर चैंपियनशिप जीत चुके थे .पंकज ने 2006 में दोहा में हुए एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता .पंकज आडवाणी ने 2008  के ओर 9 बार के चैंपियन मार्क रसेल को हराकर विश्व पेशेवर बिलियर्ड्स चैंपियनशिप की प्रतियोगिता जीती. 6 सितंबर 2009 को नार्दन स्नूकर सेंटर पर रविवार को खेले गए खिताबी मुकाबले में पंकज ने गत चैंपियन को 2030- 1253 से हराया .इस जीत के साथ पंकज बिलियर्ड्स के 139 वर्षों के इतिहास में इस खिताब पर कब्जा करने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं .इससे पहले वर्ष 1992 में यह खिताब गीत सेठी ने जीता था.

9.. पी वी सिंधू

   पुसरला वेंकट सिंधु- एक विश्व वरीयता प्राप्त भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी है तथा भारत की ओर से ओलंपिक खेलों में महिला एकल बैडमिंटन का रजत पदक जीतने वाली वह पहली खिलाड़ी हैं. इससे पहले भी भारत की नेशनल चैंपियन भी रह चुके हैं .सिंधु ने नवंबर 2016 में चीन ओपन का खिताब अपने नाम किया था. ओलंपिक रजत पदक विजेता पीवी सिंधु ने बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल में शानदार जीत दर्ज कर पहली बार इस खिताब को अपने नाम किया था. वह वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय शटलर है .फाइनल मुकाबले में उन्होंने जापान की नोजोमी ओकुहारा को 21-7, 21-7 से मात दी .अगस्त 24 ,2019 को हुए सेमीफाइनल मैच में उन्होंने चीन की चेन यूफी को 21-7,21-14 हराया. सिंधु ने सीधे 39 मिनट के अंदर की चुनौती को समाप्त कर दिया .
उन्हें 2013 अर्जुन पुरस्कार, 2015 पद्मश्री और 2016 में राजीव गांधी खेल रतन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

8.. विश्वनाथन आनंद

   विश्वनाथन आनंद भारतीय शतरंज खिलाड़ी, अंतर्राष्ट्रीय ग्रैंड मास्टर एवं पूर्व विश्व चैंपियन हैं.
 विश्वनाथन आनंद का जन्म 11 दिसंबर 1969 में हुआ था .विश्वनाथन आनंद एक भारतीय शतरंज खिलाड़ी और वह एक भूतपूर्व शतरंज विजेता है .आनंद ने पांच बार विश्व शतरंज प्रतियोगिता जीती है और वह निर्विवाद विजेता रहे हैं .विश्वनाथन आनंद 2003 में फिडे विश्व शतरंज चैंपियनशिप में विश्व शतरंज बने और वह अपने समय के ड्रिड खिलाड़ी माने जाते हैं .सन 1988 में विश्वनाथन आनंद भारत के ग्रैंडमास्टर बने .उन्हें राजीव गांधी खेल रतन पुरस्कार से सबसे पहले सम्मानित किया गया जो कि भारत का सबसे माननीय खेल पुरस्कार है विश्वनाथन आनंद को सन 2007 में भारत का पद्म विभूषण पुरस्कार दिया गया .आनंद ने शतरंज ऑस्कर 6 बार जीता है. 
विश्वनाथन आनंद इतिहास के उन 6 खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्होंने पूरे विश्व शतरंज चैंपियनशिप दर्जा सूची में 2800 के अंक को तोड़ा है.

7.. अभिनव बिंद्रा

  अभिनव बिंद्रा 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में भारत के प्रमुख निशानेबाज हैं.
 11 अगस्त 2008 को बीजिंग ओलंपिक खेलों की व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं. क्वालीफाइंग मुकाबले में 596 अंक हासिल करने के बाद बिंद्रा ने जबरदस्त मानसिक एकाग्रता का परिचय दिया और स्वर्ण पर निशाना साधने में कामयाबी हासिल की .बिंद्रा ने क्वालीफाइंग मुकाबले में चौथा स्थान हासिल किया था जबकि उनके प्रतिभागी गगन नारंग बहुत करीबी अंतर से फाइनल में पहुंच पाने से वंचित रह गए वह नौवें स्थान पर रहे थे .25 वर्षीय अभिनव बिंद्रा एयर राइफल निशानेबाजी में वर्ष 2006 में विश्व चैंपियन भी रह चुके हैं .अभिनव बिंद्रा को सन 2009 में भारत सरकार द्वारा खेल में क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था . वह पंजाब राज्य से हैं. 

6.. मैरी कॉम
  
एमसी मैरीकॉम जिन्हें मैरीकॉम के नाम से भी जाना जाता है एक भारतीय महिला मुक्केबाज हैं. वह मणिपुर भारत के मणिपुर की निवासी हैं. मैरीकॉम 8 बार विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता की विजेता रह चुकी हैं .2012 के लंदन ओलंपिक में उन्होंने कांस्य पदक जीता 2010 के एशियाई खेलों में कांस्य तथा 2014 के एशियाई खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया .2 वर्ष के अध्ययन प्रस्थान अवकाश के बाद उन्होंने वापसी करके लगातार चौथी बार विश्व गैर- व्यवसायिक बॉक्सिंग में स्वर्ण जीता .उनके जीवन पर एक फिल्म भी बनी जिसका प्रदर्शन 2014 में हुआ इस फिल्म में उनकी भूमिका प्रियंका चोपड़ा ने निभाई
मैरी कॉम अब तक 10 राष्ट्रीय खिताब जीत चुकी हैं .बॉक्सिंग में देश का नाम रोशन करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2003 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार, वर्ष 2006 में पदम श्री जुलाई 2009 को भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

5.. सचिन तेंदुलकर
  
सचिन रमेश तेंदुलकर -क्रिकेट के इतिहास में विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में गिने जाते हैं .भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित होने वाले सर्वप्रथम खिलाड़ी और सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं .राजीव गांधी खेल रतन पुरस्कार से सम्मानित होने वाले पहले क्रिकेट खिलाड़ी हैं सन 2008 में पद्म विभूषण से भी पुरस्कृत किए जा चुके हैं. सन  1989 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने के पश्चात उन्होंने बल्लेबाजी में कई कीर्तिमान स्थापित किए. उन्होंने टेस्ट ,एकदिवसीय क्रिकेट दोनों में सर्वाधिक शतक अर्जित किए. क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं. इसके साथ ही टेस्ट क्रिकेट में 14000 से भी अधिक रन बनाने वाले विश्व के एकमात्र खिलाड़ी हैं .एकदिवसीय मैचों में भी  उन्हें कुल सर्वाधिक रन बनाने का कीर्तिमान प्राप्त है. उनके अंतरराष्ट्रीय खेल जीवन की शुरुआत 1989 मे पाकिस्तान के विरुद्ध कराची से हुई .2001 में सचिन तेंदुलकर अपनी 259 पारी में 10,000 ओडीआई रन पूरा करने वाले पहले बल्लेबाज बने .दक्षिण अफ्रीका में आयोजित टूर्नामेंट के 2003 संस्करण में उन्हें पहले" प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट" नाम दिया गया था. 
उनके प्रशंसक प्यार से लिटिल मास्टर , मास्टर ब्लास्टर के नाम से पुकारते हैं .तेंदुलकर उस भारतीय दल का हिस्सा थे जिन्होंने 2011 क्रिकेट विश्व कप जीता.
 2012 में उन्हें राज्यसभा के सदस्य के रूप में नामित किया गया था.

4.. कपिल देव

  कपिल देव रामलाल निखंज भारत के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी है भारत की सर्वोच्च क्रिकेट खिलाड़ियों में उनकी गणना होती है वह भारतीय क्रिकेट के कप्तान के पद पर रह चुके हैं. 1983 के क्रिकेट विश्वकप में वह भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान थे और उनके नेतृत्व में भारत में क्रिकेट विश्व कप जीतने का गौरव प्राप्त किया .वह wisden द्वारा वर्ष 2002 में सदी के भारतीय क्रिकेटर चुने गए. वह 10 माह के लिए भारत क्रिकेट टीम के प्रशिक्षक भी रहे थे. कपिल देव का जन्म चंडीगढ़ में हुआ था.
1983 के विश्व कप में जिंबाब्वे के विरुद्ध उनकी 175 रन की की पारी याद रहेगी जिसकी बदौलत भारत वह मैच जीता . उन्हें 1979 अर्जुन अवॉर्ड ,1980 में पद्मश्री अवार्ड ,1983 में विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर, 1991 में पद्मभूषण आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया गया .
  
3... पी टी उषा

  पीटी ऊषा भारत के केरल राज्य की  हैं .वे आमतौर पर पीटी उषा के नाम से जानी जाती हैं .भारतीय ट्रैक और फील्ड की रानी मानी जाने वाली पीटी उषा भारतीय खेल कूद में  1979 से हैं .वह भारत के अब तक के सबसे अच्छे खिलाड़ियों में से हैं .केरल के कई हिस्सों में परंपरा के अनुसार ही उनके नाम के पहले उनके परिवार का नाम है .उन्हें पय्योली एक्सप्रेस नामक उपनाम दिया गया था.
400 मीटर बाधा दौड़ का सेमी फाइनल जीत के वे किसी भी ओलंपिक प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचने वाली पहली महिला और पांचवी भारतीय बनी .1986 में सियोल में हुए दसवीं एशियाई खेलों में दौड़ कूद में पीटी उषा ने चार स्वर्ण व एक रजत पदक जीते उन्होंने जितने भी दौड़ में भाग लिया सब में नए एशियाई खेल कीर्तिमान स्थापित किए 1985 में जकार्ता में हुए एशियाई दौड़ कूद प्रतियोगिता में उन्होंने पांच स्वर्ण पदक जीते एक ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतना भी एक कीर्तिमान है .उसने अब तक 101 अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं वे दक्षिण रेलवे में अधिकारी पद पर कार्यरत हैं 
1985 में उन्हें पद्मश्री व अर्जुन पुरस्कार दिया गया.

2.. मिलखा सिंह

  मिल्खा सिंह का जन्म  लायलपुर 8 अक्टूबर 1935 में राजपूत परिवार में हुआ था. वे एक सिख धावक है और जिन्होंने रोम के 1960 ग्रीष्म ओलंपिक और टोक्यो के 1964 ग्रीष्म ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था. उनको फ्लाइंग सिख का उपनाम दिया गया है .भारत के विभाजन के बाद की अपरा तफरी में मिल्खा सिंह ने अपने मां-बाप को खो दिया .शरणार्थी बनकर ट्रेन द्वारा पाकिस्तान से वह भारत आए एक होनहार धावक के तौर पर ख्याति प्राप्त करने के बाद उन्होंने 200 मीटर और 400 मीटर की दौड़ सफलतापूर्वक की और भारत के सफलतम धावक बने कुछ समय के लिए वे 400 मीटर के भी विश्व कीर्तिमान धारक भी रहे . कार्डिफ़, वेल्स ,संयुक्त साम्राज्य में 1958 के कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण जीतने के बाद सिख होने की वजह से लंबे बालों के साथ पदक स्वीकारने पर पूरा खेल विश्व उन्हें जानने लगा. इसी समय उन्हें पाकिस्तान में दौड़ने का मौका मिला लेकिन बचपन की घटनाओं से वे वहां जाने से हिचक रहे थे ,मिल्खा सिंह ने  दौड़ने का  स्वीकार किया और दौड़ में उन्होंने अपने  प्रतिद्वंदीयों  को सरलता पूर्वक ध्वस्त किया, मुस्लिम दर्शक इतने प्रभावित हुए तभी से उन्हें फ्लाइंग सिख की उपाधि मिली.
इन्हें1959 में पदम श्री से सम्मानित किया गया .

1.. ध्यानचंद सिंह
 
  भारतीय फील्ड हॉकी के भूतपूर्व खिलाड़ी एवं कप्तान भारत एवं विश्व हॉकी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में उनकी गिनती होती है. वे तीन बार ओलंपिक (एमस्टरडम 1928, लॉस एंजलिस 1932, बर्लिन 1936) के स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे .उनकी जन्मतिथि को भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस के रुप में मनाया जाता है .उन्हें हॉकी का जादूगर भी कहा जाता है .उन्होंने अपने खेल जीवन में 1000 से अधिक हो गोल दागे . जब वह मैदान में खेलने को उतरते थे तो गेंद मानो उनके हॉकी स्टिक से चिपक सी जाती थी उन्हें 1956 में भारत के प्रतिष्ठित भारतीय नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. 1937 में जब भारतीय हॉकी दल के कप्तान थे तो उन्हें सूबेदार बना दिया गया था जब द्वितीय महायुद्ध प्रारंभ हुआ तो 1943 में लेफ्टिनेंट नियुक्त हुए और भारत के स्वतंत्र होने पर सन 1948 में कप्तान बना दिए गए .
ध्यानचंद ने अपनी करिश्माई हॉकी से जर्मन तानाशाह हिटलर ही नहीं बल्कि महान क्रिकेटर डॉन ब्रैडमैन को भी अपना कायल बना दिया था .ब्रैडमैन ने तब हॉकी के जादूगर का खेल देखने के बाद कहा था इस तरह से गोल बनाते हैं जैसे क्रिकेट में रन बनते हैं .जब उनको पता चला कि ध्यानचंद ने इस दौर में 48 मैचों में कुल 201 गोल दागे तो उनकी टिप्पणी थी-" यह किसी हॉकी खिलाड़ी ने बनाए या बल्लेबाज ने" ध्यानचंद ने 1 साल बाद  बर्लिन ओलंपिक में हिटलर को भी अपनी हॉकी का कायल बना दिया था. उस समय सिर्फ हिटलर ही नहीं जर्मनी के हॉकी प्रेमियों के दिलों दिमाग पर भी एक ही नाम छाया था ध्यानचंद ,ध्यानचंद ,ध्यानचंद


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सारे जहां से अच्छा हिंदुस्ता हमारा हम बुलबुले हैं इसके, यह गुलसीता हमारा हमारा...
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ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहां न झूलते विजय के निशान हैं,
 हिंदी है हम वतन यह हमारा हिंदुस्तान है|
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